Sunday, 16 March 2014

नारी-रंग




सदा अपने अस्तित्व के खून में सनी ​
​मैं लाल रंग,
व्योम का विस्तार पर,सिमटी सकुचायी 
मैं नीला रंग,
सरसों के खेत सी पसरी,पर लाही संग 
मैं पीला रंग,
बाहर से हरियाली,अंदर ठूँठ 
भयी मैं हरा रंग,
गुलाबों सी महक व काया,कंटक सा चुभता मन 
मैं गुलाबी रंग,
दुनिया  रंग-बिरंगी करती,खुद बदरंग 
मैं नारी-रंग । 

स्वाति वल्लभा राज 

Wednesday, 5 March 2014

चटपटे ये आचार



स्वयं हित साधने में
सब यहाँ कलाकार हैं,
दूसरों को कुचलने का
हमको तो अधिकार है |

कामुक पशु,पंजीकृत हम
आचरण व्याभिचार है,
जो बने सरताज इसमें
तो फिर बलात्कार है|



भ्रष्टाचार, दुराचार;
चहुँ ओर हाहाकार है,
मद के नशे में चूर
किन्तु, धर्म औ संस्कार है|

आम -निम्बू के जैसे आज
चटपटे ये आचार हैं,
पर इंसान सुन- समझ तू
ये दानवी- व्यवहार है|

स्वाति वल्लभा राज

Thursday, 27 February 2014

बनो महाकाल




भोले भंडारी नहीं 
बनो महाकाल,
करो तांडव
असत्य पर,  
पाप का करो 
हलाहल पान,
कर दो दमन 
हिम जैसे अहम् का,
अवतरण कर दो 
पापनाशिनी गंगा का ,
जागो युगों के 
साधना से,और 
साधो पापकर्म को 
आततायिओं का वध कर
पाप-मुक्त कर दो 
सातों भुवन -भांड। 

स्वाति वल्लभा राज 




Saturday, 22 February 2014

बस्ती बनाएँ




दिलजलों की चलो सुन्दर बस्ती बनाएँ 
पत्थरों को पूजकर एक हस्ती बनाएँ 
आँसू तो सब देते हैं,दाम लेकर 
हम मुस्कान को हीं सस्ती बनाएँ...


स्वाति वल्लभा राज



Tuesday, 14 January 2014

अपाहिज



तुम्हारे हर ईक्षा के  आगे
गूंगी जबान ,
तुम्हारे हर इल्जाम में 
मैं बहरी,
तुम्हारे हर दोष के आगे 
मैं अंधी,
और तोहमत पर 
बेजुबान। 
माँ, बहन, बेटी और पत्नी हीं  नहीं  
शायद सबसे बड़ी अपाहिज भी हूँ । 

स्वाति वल्लभा राज 

Sunday, 12 January 2014

liquid basket ? ? ?




बस इसी की  कमी रह गयी थी।  जिस चीज की लत परिवार  और समाज की नींव हिला रही है, उसे और आसानी से उपलब्ध कराना । मैं हैरानी में थी  जब पिछले २-४ दिनों से liquid basket  का ऐड देख रही थी।  आज जब उस साईट को लॉग इन किया तो बस मुझे अपना DOB  एंटर करने को कहा । हासास्यपद तो ये लगा कि ऐसा करने के पीछे वजह ये लिखा था कि आपकी age कन्फर्म हो जाये ( आप लीगली alcohol ले सके ) 

क्या अगर कोई बच्चा गलत DOB एंटर करके इसका सेवन करे? आज कल ९-१० के बच्चों के पास भी अच्छी खासी pocket money होती है।   अगर घर से बाहर पढ़ाई कर रहे हैं तो  debit और क्रेडिट कार्ड भी होते हैं । दूकान से तो लेने में हिचक हो या उम्र आड़े आये मगर यहाँ?  यह उम्र बस प्रयोग चाहती है । विशेषकर जो मना होता है वो करना चाहती है। नकारात्मक वस्तुएं ज्यादा आकर्षित करती हैं इन्हे। कहीं न कहीं एक दीवार ,एक बैरियर था पर इस product को  on line available कराना कहाँ तक उचित है? 

किस समाज का निर्माण कर रहे हैं हम और भावी पीढ़ी को क्या दिशा दे रहे हैं? फिर कल को यह पीढ़ी गलत करेगी तो कोसेंगे इसे।  पर हम इनके पथ निर्माण के लिए क्या कर रहे हैं? 

स्वाति वल्लभा  राज 

Sunday, 8 December 2013

धड़कन में ''आप '' है




मन मयूर सा नाचे, अंखियों में अविरल धार है 
सच्चाई और निष्ठा के आगाज़ का अंदाज़ है
कब तक चुप रहते,सहते-कुढ़ते 
बेईमानी ना पल भर स्वीकार है । 

अंगड़ाई लेकर उठे हो अब की 
फिर तुम कहीं ना सो जाना 
सपूत हो,सपूत हीं रहना 
लालच के दरिया में तुम भी,हमसे कहीं ना खो जाना । 

कीचड़ में खिलने का साहस 
करता है केवल ''अरविंद''  हीं 
आत्म-विश्वास से लबरेज मन , सत्य पथ- प्रशस्त है 
साँसों में आस और धड़कन में ''आप '' है । 



स्वाति वल्लभा राज