अनीह ईषना
Tuesday, 14 June 2011
और प्यार हो गया
जमाने की रुसवाइयां भी कर गए अनदेखा
उनके दर्द को इस कदर लगाया खुद से|
दफन कर गये हर एहसास को अपने
उनके ख्वाबो को यूं सजाया खुद से|
स्वाति वल्लभा राज
तकिये गीले है
कुछ सपने टूट कर बह निकले
की आज फिर तकिये गीले हैं|
अभी तक नमी महसूस हो रही,
की हम फिर सोतों से मिले हैं|
न सूखते है ये सोते
ना सपने ही पूरे होते हैं|
अमिट छाप छोड़ते ये
अनवरत यूँ हीं बहते हैं|
अश्रु क्या है,
मन -मंदिर के टूटे हुए
सपनो की छवि,
वास्तविकता के पटल पे
जो बनते और बिगड़ते हैं|
स्वाति वल्लभा राज
Thursday, 9 June 2011
कशमकश
बादलो को घिरता देख आज
मन फिर से भरमा गया |
आज नाचूंगी या
बादलो के संग
अन्तः मन को भिगोउंगी मै |
स्वाति वल्लभा राज
Wednesday, 8 June 2011
इंतज़ार और सही
आंसुओ के सैलाब में डूबे अरमान और
थकती हुई चाहत जरुर है मगर
इरादे अब भी गगनचुम्बी है
हौसले अब भी अटल है |
सपने हकीकत के लिबास में
आएगी सज धज के,
उन सपनो के तामीर को
इंतज़ार और सही |
स्वाति वल्लभा राज
Friday, 3 June 2011
Seelan
गुजरे वक़्त की सीलन ,
अब भी मौजूद है दीवारों में .
रंगों की कई परत भी
निशान न मिटा सकी.
Fursat ke pal
फुर्सत के पल
आज काटते है बेहिसाब
कभी इन्ही के आगोश में
ज़िदगी आबाद थी .
Wednesday, 1 June 2011
GUZARISH
ज़लालत भरे इस जिंदगी को संवारने जहां में कहीं यक़ीनन मेरा करीम होगा.
दर्द हद से पार कब का गुज़र गया इसके इख्तेताम को मयस्सर कोई हाकिम होगा .
बुत बने खुदा के नूर पाने को तालीमो में मुकम्मल कोई तालीम होगा.
न थम मेरे अश्क दरिया सा बहता जा , कोई तो कतरा उसे अज़ीम होगा .
स्वाति वल्लभा राज
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