Wednesday, 14 October 2015

रजस्वला ​ धर्म और कर्म कांड


लगभग हर धर्म में मासिक धर्म के समय स्त्रियां पूजा पाठ से अलग रहती हैं| हिंदू धर्म में इसके अलावा भी काफी चीजें वर्जित रहती हैं| जैसे आचार नहीं छूना है, पौधों को पानी नहीं देना, नीचे चटाई पर सोना, रसोईघर से दूर रहना आदि| मतलब स्नान करके ‘’शुद्ध’’ होने तक स्त्रियां अछूत रहती हैं| 

‘भविष्यत पुराण’ के ‘’ऋषि पंचमी ‘’ कथानुसार सुमित्र नाम का एक ब्राह्मण था उसकी पत्नी का नाम जयश्री था। मासिक धर्म के समय भी भोजन बनाकर खुद खाने और अपने पति को खिलाने की वजह से जन्म में जयश्री को कुत्ते और ब्राह्मण को बैल के रूप में जन्म लेना पड़ा |

भागवत पुराणानुसार देव राज इंद्र पर ब्रम्ह ग्यानी गुरु के ह्त्या का पाप लगा|वो इस पाप के बोझ को सह नहीं पा रहे थे तो जल,पृथ्वी,पेड़-पौधों और स्त्री को अपने इस ब्रम्ह ह्त्या के पाप का बोझ एक-एक चौथाई बाँट दिया| इन पाप के वहाँ से सबमे नाकारात्मक बदलाव आया परन्तु साथ मे इंद्र ने वरदान भी दिया सबको| स्त्रियों में रजस्वला प्रारम्भ हुवा और वरदान स्वरूप उन्हें पुरुषों की तुलना में काम सुख ज्यादा अनुभव करने का वरदान मिला| मतलब मासिक धर्म समय स्त्रियां ब्रह्म ह्त्या के पाप ढोती हैं इस वजह से वो कर्म कांड से दूर रखी जाती हैं| 

अब जरा वैज्ञानिक तथ्यों पर नज़र डालते हैं| साफ़ सफाई जरुरी है| मगर अछूत जैसा व्यवहार कहीं से भी उचित नहीं| त्यौहार के समय ना तो बेचारी भाग ले पाती हैं और शर्मिंदगी महसूस होती है वो अलग|
मगर स्त्रियां आज कल घर बाहर सब जगह काम कर रहीं तो इस तरह की सोच बदल तो रही हैं मगर अब अभी इन सबका बहुत असर है और काफी बड़े पैमाने पर है|

जरा सोचिये इतने सारे बंधनों के साथ किसी स्त्री के लिये ३ दिन रहना कितना मुश्किल है|कई जगह नहाना भी वर्जित होता है| इस समय सफाई जरुरी है मगर अंध विश्वास क्या कराता है| बाहर निकलना भी नहीं होता| बस एक कमरे में हीं रहना होता है|
धार्मिक विचारों और ग्रंथों के अनुसार रजस्वला स्त्रियां पहले दिन चंडालिनी, दूसरे दिन ब्रह्म घातिनी और तीसरे दिन धोबिन स्वरूपा होती है | इसके पीछे क्या तथ्य है? इसी वजह से पति के साथ एक कमरे में रहना भी वर्जित होता है| मजे की बात तो यह है कि जाप और ध्यान में कोई मनाही नहीं है| मतलब ध्यान और जप से ज्यादा महत्ता कर्म कांड की हो गयी? अगर ब्रह्म ह्त्या वाला कोण देखे तो भी जो स्त्री दूसरों के पाप का वाहन कर रही वो भला अछूत कैसे हो सकती है? जो प्रक्रिया नए जीव के रचना के लिये जरुरी है भला वो प्रक्रिया अछूत कैसे हो सकती हैजरुरत है इन सब से ऊपर उठ कर चीजों को सही चश्मे से देखने की| ढोइए नहीं| बदलिए| और समझ बुझ कर|
स्वाति वल्लभा राज

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 16 अक्टूबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. ढोइए नहीं,.. बदलिए. बिलकुल सही कहा आपने...
    ......बिडम्बना है कि आज भी कई पढ़े-लिखे लोग अन्धविश्वास से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं ...
    अच्छी प्रेरक जागरूकता भरी प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद ...जागरूकता लाने के लिए जो कुछ बन पड़े वो हम सब करे ...बदलाव हम ला सकते हैं ...

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, कॉल ड्राप पर मिलेगा हर्जाना - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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