Tuesday, 14 January 2014

अपाहिज



तुम्हारे हर ईक्षा के  आगे
गूंगी जबान ,
तुम्हारे हर इल्जाम में 
मैं बहरी,
तुम्हारे हर दोष के आगे 
मैं अंधी,
और तोहमत पर 
बेजुबान। 
माँ, बहन, बेटी और पत्नी हीं  नहीं  
शायद सबसे बड़ी अपाहिज भी हूँ । 

स्वाति वल्लभा राज 

6 comments:

  1. सबसे बड़ी अपाहिज ही हूँ
    God Bless U

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मकर संक्रांति की हार्दिक मंगलकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. कड़वा यथार्थ |

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  4. बहुत गहन और सुन्दर |

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  5. ओह ...
    मंगलकामनाएं आपको !

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  6. मार्मिक,सटीक सारगर्भित प्रस्तुति - हार्दिक बधाई

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