Saturday, 22 February 2014

बस्ती बनाएँ




दिलजलों की चलो सुन्दर बस्ती बनाएँ 
पत्थरों को पूजकर एक हस्ती बनाएँ 
आँसू तो सब देते हैं,दाम लेकर 
हम मुस्कान को हीं सस्ती बनाएँ...


स्वाति वल्लभा राज



5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (23-02-2014) को " विदा कितने सांसद होंगे असल में" (चर्चा मंच-1532) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. कोशिश में कामयाब रहना
    हार्दिक शुभकामनायें

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  3. वाह ... लाजवाब क्या बात है ...

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