Monday, 7 July 2014

तिरिया चरितर(त्रिया चरित्र)




भूखे बच्चे का पेट भरने को 
और बीमार पति के इलाज़ को 
जब जूठन मलने से काम न चला तो 
आखिर नीलाम कर दिया खुद को उसने । 

औरत के लिए उसके इज्जत के आगे भी 
होती है सिंदूर और कोख की अहमियत,
तभी तो नियति से मजबूर हो,
खुद का अस्तित्व खो 
बन जाती है -
''तिरिया चरितर ''?

स्वाति वल्लभा  राज 

1 comment:

  1. ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, इंसान की दुकान मे जुबान का ताला - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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