Thursday, 24 May 2012

माहिया


मुझे मात्राओं का उतना ज्ञान नहीं है|फिर भी नयी विधाओं को सिखने कि लालसा है|कॉलेज मे तो इतना समय नहीं मिल पाता की कुछ नया सीख पाऊं|गर्मियों की छुट्टी का उपयोग करना चाहती हूँ|अगर कोई त्रुटि हो तो जरुर बताइयेगा|अगर कोई ऐसा लिंक जो मात्राओं को समझने मे मेरी मदद करे,कृप्या जरुर बताइयेगा|

"महिया" पंजाब का प्रसिद्द लोकगीत है। माहिया का मूल स्वर प्यार मुहब्बत और मीठी नोंक झोंक है ।इसमें श्रृंगार रस के दोनों पक्ष संयोग और वियोग रहते हैं लेकिन अब अन्य रस भी शामिल किये जाने लगे हैं। इस छन्द में पहली और तीसरी पंक्ति  में 12 -12 मात्राएँ तथा दूसरी पंक्ति में 10 मात्राएँ होती हैं । पहली और तीसरी पंक्ति  तुकान्त होती है । 




1.रिमझिम बरसे फुहार
फूल खिले, महके
अमिया की है बहार|


2.न स्याह श्वेत का मेल
हर पल तुम बिन मैं
जलूँ बाती,बिन तेल|

स्वाति वल्लभा राज

11 comments:

  1. बहुत सुन्दर्।

    ReplyDelete
  2. दोनों ही बहुत सुन्दर है...

    ReplyDelete
  3. भाव अच्छे हैं स्वाती जी....
    मगर जो मात्राएँ आपने कहीं हैं वो कहाँ बराबर हो रही हैं???
    या हमें ही समझ नहीं आया क्या???
    :-)
    पहले छंद में १०/७/८ हो रहा है????

    ReplyDelete
    Replies
    1. हो सकता है आप सही कह रही हो|मुझे सच में नहीं पता है|मैंने रामेश्वर कम्बोज जी से संपर्क किया है|उनके मार्ग-दर्शन में सिख रही हूँ|माफ़ी चाहूंगी त्रुटियों के लिए|दुसरे में मात्रा सही है?पहले में मुझे कृपया तोड़-तोड़ कर मात्राएँ समझा दीजिये|मैं सीख सकूँ,इसीलिए इसे पोस्ट किया था|आपने ध्यान दिया,आभार|

      Delete
  4. वाह !!! बेहतरीन रचना...

    ReplyDelete
  5. मात्राओं की जानकारी तो मुझे भी नहीं है.. पर आपकी पंक्तियाँ सुन्दर बहुत हैं.. निस्संदेह! :)

    ReplyDelete
  6. स्वाति जी ,

    बहुत सुंदर माहिया रचनाएँ ....

    मात्राएं अभी तो बिलकुल सही हैं === पहली और तीसरी पंक्ति में 12 और दूसरी में 10 हैं ...

    अनु जी ने शायद वर्ण / अक्षर गिन लिए हैं ...

    रिमझिम == 4 मात्राएं --
    बरसे ==== 4
    फुहार == 4

    अ , छोटी इ छोटा उ ऋ की मात्राएं --- एक गिनी जाती हैं बाकी सब दो मात्राएं गिनी जाती हैं

    ReplyDelete
    Replies
    1. मैं मात्राओं के मामले में कच्ची हूँ तो आत्म-विश्वास कि थोड़ी कमी है|सच में साहित्य कि इन विधाओं के गुण सीखना और अमल करना बहुत हीं कठिन है|हम नव निहालों को तो ये हमेशा आकर्षित और भ्रमित करेगा|मेरे और अनु जी के असमंजस को दूर करने के लिए दिल से धन्यवाद|मार्ग दर्शन देते रहिएगा|
      आभार

      Delete
  7. कल 17/07/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete