Wednesday, 27 June 2012

रूप घनाक्षरी


रूप घनाक्षरी,वार्णिक छंद के भेद हैं|इसकी रचना सिर्फ वर्ण गड़ना के आधार पर होती है| २६ से ज्यादा वर्णों कि संख्या वाले वार्णिक छंद, “दंडक” की  श्रेणी में आते हैं और २६ से कम वर्णों की  संख्या वाले “साधारण” की श्रेणी में| रूप घनाक्षरी में ३२ वर्ण होते हैं| १६-१६ वें वर्ण पर या प्रत्येक ८ वें वर्ण पर यति होते हैं|

स्वाति बिन मोती नहीं,
नाहिं हरि बिन कूक|
प्रीति बिन गति नहीं,
काहें  होवे फिर चूक?

हरि-कोयल
गति-मोक्ष
स्वाति वल्लभा राज

3 comments:

  1. बहुत खूब ..
    वाकिफ हुआ

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  2. पुन्य कार्य

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