Thursday, 23 July 2015

चाह नहीं अरमान बनो तुम



बदलते वक़्त की पहचान बनो तुम 
पशु नहीं इंसान बनो तुम ,
ज़िंदगी में कठिनाइयां हैं तो क्या 
लक्ष्य पर चमकते  निशान बनो तुम 

चाह नहीं अरमान बनो तुम 
खुशीयों  का प्यारा जहाँ बनो तुम ,
हर शाह को जो मात दे 
वो आगाज़ नहीं अंजाम बनो तुम । 

स्वाति वल्लभा राज 

7 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, संघर्ष ही सफलता का सोपान है - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 03 अगस्त 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. ​बहुत बहुत धन्यवाद ​

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  3. शानदार प्रस्तुति...

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