Friday, 10 February 2012

ऐ प्यार तू अनामिका होता

 
ऐ प्यार तू अनामिका होता तो
ऐसे बदनाम ना होता|
शब्द-सीमा से परे होता
तो अनाहत अनाश्य होता|

अनिंदित,अनादी होता,
अनामय अनवरत होता|
शब्द-जाल में फंसा ना होता
तो अछिन्न,अच्युत, अचल होता|

तू अतर्कित,अतर्क्य होता
तू अतन,अवनी,हवन होता|
मोह-जाल में फंसा ना होता
तो अतुल,अकथ,अत्रस्त होता|
स्वाति वल्लभा राज

15 comments:

  1. सुंदर....
    प्रेम अनंत है..नाम हो या अनामिका..प्रेम तो अनमोल है..

    बहुत खूब.

    ReplyDelete
  2. अद्भुत-सी अनुपम और अलंकृत रचना, साभार!

    ReplyDelete
    Replies
    1. BTW, bloggers mein aane ka mera ek uddeshya tha 'Aarogyam'... http://aarogyam-nature.blogspot.com/2012/02/trans-fats.html Agar aapko sahi lage to samarthan chahunga.. dhanyavaad!

      Delete
  3. प्यार -
    कभी नाम कभी अनाम
    कभी मुक्त कभी बेबस
    कभी शोर कभी खामोश
    कभी नदी कभी सागर
    कभी प्रश्न कभी उत्तर
    कभी धीर कभी शरारत
    कभी भोर कभी रात
    कभी देना कभी पाना
    खुदगर्ज़ कभी नहीं ....

    ReplyDelete
  4. बहुत खूब ...
    बहुत सुन्दर प्रेमपगी रचना...

    ReplyDelete
  5. प्यार - प्यार ही होता तो बेहतर होता .....आपने बहुत सुन्दरता से उसे परिभाषित किया है ....यह पहलू भी अच्छा लगा ......!

    ReplyDelete
  6. कल 13/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  7. bahut khoob...

    http://www.poeticprakash.com/

    ReplyDelete
  8. अनिंदित,अनादी होता,
    अनामय अनवरत होता|
    शब्द-जाल में फंसा ना होता
    तो अछिन्न,अच्युत, अचल होता|
    ...pyar ko bibhin aayamon mein dekhna bahut achha laga...

    ReplyDelete
  9. ||राधा, मीरा प्रेम है, प्रेम खुदा का नाम
    प्रेम कृष्ण की बांसुरी, प्रेम कहाँ बदनाम?||

    ReplyDelete
  10. प्रेम कथा, सुंदर

    ReplyDelete